प्रधानमंत्री मोदी ने अपने जीवन के 76 वर्ष 76 वर्ष की आयु के हो गए हैं
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अब तक लगातार 25 वर्षों तक सत्ता में बने रहने का एक अनोखा और अद्भुत रिकॉर्ड बनाकर अपने नाम सुरक्षित कर लिया है
जैसा हमने अपने पिछले आलेख में स्पष्ट किया प्रधानमंत्री मोदी की में असाधारण उपलब्धियां को लेकर भारत सहित पूरे वैश्विक मंच पर एक अभूतपूर्व हर्षोल्लास का दृश्य दिखाई पड़ रहा है
विश्व के राष्ट्रपतियों प्रधानमंत्री और प्रमुख हस्तियों ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई संदेश शुभकामनाओं के अतिशय स्नेह स्नेह और आधार एवं सम्मान की अभिव्यक्ति की अभिव्यक्ति को रेखांकित करने वाले विशेष प्रकार के पत्र प्रधानमंत्री मोदी को लगातार भेज रहे हैं और कहीं शक्ति राजनेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात करके भी उन्हें बधाई दी है शुभकामना शुभकामनाएं दिए हैं और उनके देर जीवन की कामना की है
प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धियां और इन संदर्भ में उनके द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड किस श्रंखला इतनी लंबी है केक आलेख में पूरा सहज पाना बिल्कुल ही असंभव कार्य है
फिर भी हमने यह प्रयत्न करना प्रारंभ किया है क्यों उनकी जो खास उपलब्धियां हैं और जिनके कारण भारत के अंदर ही नहीं पूरे वैश्विक पटेल पर सधिक लोकप्रियता के शिखर पर कई वर्षों से हसीन है और वैश्विक मंच पर तो शक्तिशाली से शक्तिशाली राष्ट्र के कोई राष्ट्रपति या कोई प्रधानमंत्री उनकी लोकप्रियता के करीब तो है ही नहीं मोदी की लोकप्रियता के आगे वैसे सभी वैश्विक राजनेता मोदी से बहुत पीछे खड़े हैं
हां तुम मोदी की लोकप्रियता का आकलन इन तत्वों से कर सकते हैं मुस्लिम बहुल देश हो ऐसा ही धर्म के के प्रभाव वाले देश बहुत धर्म से संबंधित रसों इकलौता देश देश इजराइल हो जो आज के दिनेश छोटा सा देश होते हुए भी इसराइल एक सरस्वती चालीसा हो गया है जिसकी चर्चा संपूर्ण विश्व पटेल पर होती रहती ह
यही कारण है की आज एशिया यूरोप ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे सभी महादेशों में प्रधानमंत्री मोदी के लोकप्रियता चरम पर है
जब प्रधानमंत्री के रूप में मोदी भारत की सत्ता पर आए तो चिदंबरम जी से नहीं मालूम है तो फिर मोदी तो भारत को गलत में ही पहुंचा देगा
रूस की बात तो छोड़िए रूस तो भारत का सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ और सबसे भी स्वस्थ मित्रा तो है ही वहां शासन में कम्युनिस्ट रहे हो या कम्युनिस्ट शासन के अंत के बाद और सोवियत संघ के बंटवारे के बाद भी जो राष्ट्रपति रूस के हुए हैं और खासकर राष्ट्रपति पुतिन दो लंबे समय से रूस के राष्ट्रपति बने हुए हैं और पुतिन और मोदी के बीच की दोस्ती तो प्रभावी कहिए या अंतरंग मित्रता कहिए किंतु पुतिन खुलकर केहते हैं कि मोदी अपने राष्ट्र के प्रति पूरी तरह समर्पित है और दुनिया का कोई भी देश उन्हें झुका नहीं सकता है या कंप्लीमेंट या बतलाता है कि मोदी ने भारत को कहां पहुंचा दिया है
जब हम विदेश नीति की बात कर रहे हैं कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की तुलना में नेहरू सहित जितने भी प्रधानमंत्री हुए उन सबों के विदेश नीति मोदी के सामने ठहरती ही नहीं है और सिर्फ भारत ही नहीं पूरा विश्व या मानता है
रूस यूक्रेन का दो युद्ध चल रहा था चल रहा है भारत में रस को भी कहां के युद्ध कोई विकल्प नहीं है और शांति की ओर अग्रसर होना ही चाहिए या खाने के बावजूद भी मोदी ने तो रस को छोड़ा और ना रूस ने मोदी से किनारा किया बल्कि दोनों की दोस्ती परवान चढ़ती रही
यूक्रेन भी भारत की और हाथी बहुत आ रहा कि भारत के प्रधानमंत्री ही कोई हल निकाल सकते हैं और यह भी याद रखिए की पूरी दुनिया में युद्ध के दौरान ऐसा पहली बार हुआ जब भारत के नागरिकों को यूक्रेन से सुरक्षित निकालने के लिए युद्ध विराम तक कर दिया गया अब बताइए कि मोदी ने देश के लिए क्या नहीं कर दिया है फिर भी लोग कुछ कहते हैं कि मोदी ने क्या किया अरे मोदी ने तो वह कर दिया जो दुनिया के किसी भी देश के किसी भी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री ने नहीं कर पाया था कोई भी देश हो सभी अमेरिका को सर्वश्रेष्ठ और सबसे शक्तिशाली पावर मानते रहे हैं और किसी किसी को दम नहीं है क्यों वह अमेरिका के राष्ट्रपति के फोन कॉल को इग्नोर कर दे और कभी-कभी अगर और कभी-कभी जवाब दे भी तो ठेठ भाषा में यानी जैसे को तैसा
पहली बार जब ट्रंप राष्ट्रपति हुए थे अमेरिका के तो उन्होंने दुनिया के सामने ऐसा दिखाया कि मोदी उनके घनिष्ठ मित्र हैं
लेकिन दोबारा जब कोई सुनकर फिर राष्ट्रपति बनकर आए तो अपने स्वार्थ के कारण पाकिस्तान को अपना पिछला ग बनाते हुए उसकी पीठ ठोकते हुए अपनी बेटी दामाद के बिजनेस के लिए ट्रंप ने भारत के ऊपर पाकिस्तान जैसे भीख होंगे देश और बांग्लादेश जैसे सड़े गले देश को भी दर्जी देना शुरू कर दिया और उन्होंने लगातार झूठ बोला कि भारत जो ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान के विरोध में चल रहा था और उसे ऑपरेशन के कारण कुछ ही दिनों के अंदर पाकिस्तान हो गया और जब पाकिस्तान ने खुद पहल की तो भारत में मोहलत दिया और उसे समय ऑपरेशन सिंदूर तत्काल रोक दिया गया लेकिन आज भी औपचारिक रूप से ऑपरेशन सिंदूर पूरी तरह से तो में है
और उधर ट्रिप में पूरी दुनिया को एक झूठ परोस दिया कि हमारे कहने के बाद ही भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम हुआ है
इन्हीं सब कर्म से मोदी ने पूरी तरह ट्रंप से दूरी बना ली और फिर तो जो होता रहा वह आप और हम सभी जानते ही हैं की फिर क्या सब हुआ और क्या हो है और एक बार ट्रंप ने कहा आप तो अमेरिका के अभी नजदीक में कहीं पर है तो आ जाइए अमेरिका हम लोग साथ मिलकर भोजन करेंगे लेकिन मोदी ने ट्रंप की पूरी शक्ल चला की पकड़ ली ट्रंप पहले से ही पाकिस्तान के अपने पिट्ठू सेनापति को मुनीर को बैठ कर रखा था व्हाइट हाउस में और चाहता था की दोनों को एक साथ रखकर लंच का आनंद लिया जाए
लेकिन मोदी तो मोदी हैं और इसीलिए तो पूरी दुनिया में जहां भी जाते हैं तो वहां के जो प्रवासी भारतीय हैं हुए तो सबके सब पहुंच कर मोदी मोदी मोदी मोदी का उद्घोष करने लग जाते हैं और कई कई मिनट तक लगातार करते रहते हैं लेकिन ताज्जुब नहीं कीजिए जहां हुए जाते हैं उसे देश के मूल निवासी भी पूरी संख्या में उपस्थित होकर मोदी मोदी मोदी का ही तो उद्घोष भारतीयों के साथ मिलकर मिंटो मिंटो तक करते रहते हैं
आज पूरी दुनिया में सत्ता समीकरण तेजी से बदल रहे हैं चुप नहीं की के होंगे आप हालांकि पूरी तरह वह आश्चर्य का दृश्य था जब ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति महोदय को आमंत्रित किया था हुए बेशक सम्मेलन में उपस्थित हुए थे और उसे आश्चर्यजनक दृश्य को आपने कहीं ना कहीं जरूर देखा होगा ईरान के राष्ट्रपति वही रन जो आज काम से कम एक कट्टर इस्लामिक देश माना जाता है और जिस इस्लाम में पैर छूने की हिम्मत हुई इजाजत है और ना कभी कोई परंपरा ही रही है और दिल्ली में जब रिस्क सम्मेलन हो रहा था और उसे सम्मेलन के साइड लाइन में धार्मिक गोष्ठी हुई थी तो वहां एक भारतीय संत को ईरान के राष्ट्रपति महोदय ने खुलकर चरण छूकर अपूर्व अविश्वसनीय आश्चर्यजनक दृश्य को देखकर दुनिया अचंभित थी आवक थी
कहां गए हुए लोग जो कहते थे मोदी को राजनीति वैश्विक राजनीति विदेश नीति का एबीसीडी मालूम ही नहीं है
और अब तो भारत ही नहीं पूरी दुनिया का रही है कि मोदी की डिप्लोमेसी मोदी के इंटरनेशनल पॉलिटिक्स का ज्ञान अचंभित करने वाला है और आज की तारीख में किसी भी देश के पास इस स्तर की डिप्लोमेसी इस स्तर की राजनीतिक सूझबूझ वाली रणनीति नहीं है नहीं है
आज उसे अपूर्व दृश्य को देखकर सनातनियों को हिंदुत्व वीडियो को राष्ट्रवादियों को खुश होकर घूमना चाहिए जब वह देख रहे हैं अपनी नंगी आंखों से इस्तेमाल मुस्लिम देश आपस में तैयार होकर भेजने के लिए उतावले हैं
मोदी ने विश्व सम्मेलन के साइड लाइन में यह विक्रमाद करके दिखा दिया किरण और संयुक्त अरब अमीरात अर्थात यूएई के बीच घनघोर दुश्मनी होने के बावजूद भी मोदी के प्रयास से दोनों देश के राष्ट्र अध्यक्षों के बीच बातचीत तो कम से काम शुरू हो ही गई
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान जब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ईरान हमारा दोस्त था ईरान हमारा दोस्त है और ईरान हमारा दोस्त रहेगा
तो आप आसानी से समझ सकते हैं की ड्रम जो अमेरिका के राष्ट्रपति हैं उन्हें कैसा लगा होगा
मानिए ना माने या तो लोगों के मन की बात है लेकिन तथ्य तो यही है कि भारत के किसी प्रधानमंत्री ने तो नहीं ही दुनिया के किसी भी देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री ने अमेरिका जैसे सर्वशक्तिमान राष्ट्र के राष्ट्रपति का पैसा तिरस्कार किया होगा और आज मानकर चलिए कि भारत की सफल कूटनीति की वजह से अमेरिका अभी तो खाने के लिए सुपर पावर है लेकिन उसका पावर का हुआ पावर तो नहीं ही रहा और उसका सारा पावर समय ज्यादा दूर नहीं जब जब भारत की वजह से अमेरिका की स्थिति कमजोर हो जाएगी प्रतिष्ठा तो एक बड़े हद तक खत्म ही हो गई है अमेरिका की
आज एक नए वर्ल्ड ऑर्डर का उदय होने जा रहा है लेकिन खैर अभी थोड़ा इंतजार करना होगा किंतु रस चीन यूरोप के कुछ देश ब्राज़ील जापान संयुक्त अरब अभी-अभी रात ऑस्ट्रेलिया फ्रांस जैसे देशों की गतिविधियां खुश तो संदेश दे ही रही हैं
इंडोनेशिया अभी मुसलमान की आबादी वाला सबसे बड़ा देश है
लेकिन वहां के पूर्व के राष्ट्रपतियों ने भी प्रधानमंत्री ने भी विदेश मंत्रियों ने भी कई आयोजनों के अवसर पर कहा कि हम मजहब से तो इस्लाम कबूल कर चुके हैं लेकिन हमने अपनी संस्कृति को सुरक्षित रखा है और उनका साफ-साफ इशारा सनातन संस्कृति की ओर था और आज भी पूरे इंडोनेशिया में राम को ही आदर्श माना जाता है वहां सालों भर कहीं ना कहीं रामलीला का अभिमांचन होता ही रहता है और वहां का जो पाली द्वीप है वहां तो पूरे साल रामलीला का परिदृश्य उपस्थित होता रहता है
याद रखिए कि भारत के नोटों और सिक्कों पर से अभी तक भी गांधी का चित्र नहीं जाता है जबकि अब तो पूरी दुनिया जान चुकी है की गांधी क्या थे और क्या नहीं थे इस पर हमने विवेचना पहले भी की है और आगे भी विस्तार से करेंगे ही
लेकिन अब मेरे जैसे लोगों को शर्म आती है की नोटों और सिक्कों पर जब गांधी का चित्र होता है और कोई हमसे यह पूछ ले की कहानी क्या थे
तो हमें शर्मिंदगी से मुंह छुपाने की जगह भी नहीं मिलेगी आप समझ ही चुके होंगे कि हम गांधी के किस संदर्भ में बोल रहे हैं
इंडोनेशिया के मुद्रा और नोटों पर भगवान श्री गणेश के चित्र स्थापित कर दिए गए हैं और वर्षों से स्थापित हैं जब एक बार इंडोनेशिया में वहां की मुद्रा का अवमूल्यन हो गया था तो वहां के राष्ट्रपति ने बाली द्वीप से एक हिंदू पुजारी का लीजिए पंडित का लीजिए उन्हें बुलाया था और उनकी सलाह पर भगवान श्री गणेश का चित्र अंकित करवा दिया गया मुद्रा और नोटों पर और फिर मानिए तन मानिए लेकिन इंडोनेशिया ने आर्थिक प्रगति का रास्ता तेजी से तय करना प्रारंभ कर दिया
आज भी वहां की हवाई सेवा का नाम गरुड़ एयरवेज है और यदि आप शास्त्रों को जानते हैं तो आपको जरूर मालूम होगा कि भगवान विष्णु की सवारी गरुड़ ही है
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने जब प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया गए थे तो उनके सामने सार्वजनिक रूप से कहा था और फिर जब विश्व सम्मेलन के समय
कि हमने और हमारे कई मंत्रियों ने अपने डीएनए की जांच करवाई है और डीएनए की जांच से यह पता चला है कि हमारा और भारतीयों का डीएनए एक ही है
वहां के राष्ट्रपति ने खुलकर इंडोनेशिया में ही प्रधानमंत्री मोदी जी के सामने ही सार्वजनिक रूप से कहा था की इंडोनेशिया की जो भाषा है उसमें कम से काम तो 50% शब्द विशुद्ध रूप से संस्कृत भाषा के हैं और इसीलिए आपने सुना होगा और आप जानते होंगे की इंडोनेशिया के प्रमुख नेताओं और सामान्य लोगों के भी नाम में संस्कृत के शब्द भरे पड़े हैं
इंडोनेशिया सबसे बड़ा देश है मुसलमानों का सबसे बढ़िया आबादी मुसलमानों की है
किंतु वहां रत्ती भर वीजा झलक अब संस्कृति की नहीं मिलती है
इस बार तो इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने दिल्ली जाकर विश्व सम्मेलन के साइड लाइन में यह कहा कि हम प्रधानमंत्री मोदी के फॉलोअर हैं और यह भी जोड़ दिया कुछ लोग इसे अन्यथा नहीं लेंगे
तो आज हमने प्रधानमंत्री मोदी के विदेश नीति की उपलब्धियां जिन्हें असाधारण उपलब्धियां की संज्ञा दी जाती है और प्रधानमंत्री मोदी की श्रेष्ठतम कूटनीतिक क्षमता के भी चर्चा की है.
إرسال تعليق